कोसी नदी में बड़ा नाव हादसा: मूंग तोड़ने जा रहे ग्रामीणों से भरी नाव पलटी, कई लोग लापता

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Supaul Boat Accident: बिहार के सुपौल जिले से मंगलवार सुबह एक दर्दनाक खबर सामने आई है। कोसी नदी में ग्रामीणों से भरी एक नाव अचानक पलट गई, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि नाव पर सवार लोग रोज़गार और आजीविका की तलाश में नदी पार कर मूंग की फसल तोड़ने जा रहे थे, लेकिन बीच धारा में हुई इस दुर्घटना ने कई परिवारों की खुशियां पल भर में छीन लीं। हादसे के बाद नदी किनारे चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जबकि परिजन अपनों की तलाश में नदी किनारे टकटकी लगाए खड़े हैं।

कोसी नदी में हुआ हादसा, कई लोगों के लापता होने की आशंका

मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना भपटियाही थाना क्षेत्र के बनेनिया घाट के पास हुई। ग्रामीणों से भरी नाव बनेनिया घाट से पलार गांव की ओर जा रही थी। नाव पर सवार अधिकांश लोग नदी पार कर खेतों में मूंग तोड़ने के लिए जा रहे थे। इसी दौरान बीच नदी में अचानक नाव असंतुलित होकर पलट गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा इतना अचानक हुआ कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। नाव पलटते ही कई लोग नदी की तेज धारा में बह गए, जबकि कुछ लोग नाव के सहारे तैरकर किनारे पहुंचने की कोशिश करते रहे।

स्थानीय ग्रामीण बने देवदूत, कई लोगों की बचाई जान

हादसे की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर दौड़ पड़े। स्थानीय लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर नदी में छलांग लगाई और बचाव कार्य शुरू किया। ग्रामीणों की तत्परता से 4 से 5 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

बचाए गए लोगों को तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि स्थानीय लोग समय पर नहीं पहुंचते तो मृतकों और लापता लोगों की संख्या और अधिक हो सकती थी।

क्षमता से अधिक सवारियों की चर्चा

घटना के बाद यह बात भी सामने आ रही है कि नाव पर उसकी क्षमता से अधिक लोग सवार थे। हालांकि प्रशासन की ओर से अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि नाव में काफी संख्या में ग्रामीण सवार थे।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में नाव ही नदी पार करने का मुख्य साधन है। खेती-किसानी और मजदूरी के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग नाव के जरिए एक किनारे से दूसरे किनारे जाते हैं। ऐसे में कई बार नावों पर जरूरत से ज्यादा लोग सवार हो जाते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।

प्रशासन और राहत दल मौके पर

नाव हादसे की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन हरकत में आ गया। पुलिस, आपदा प्रबंधन विभाग, स्थानीय गोताखोरों और राहत-बचाव दल को तत्काल घटनास्थल पर भेजा गया।

प्रशासन की टीम नदी में लापता लोगों की तलाश कर रही है। गोताखोर लगातार नदी के विभिन्न हिस्सों में खोज अभियान चला रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, जब तक सभी लोगों का पता नहीं चल जाता, तब तक रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहेगा।

एक अधिकारी ने बताया कि प्राथमिकता लापता लोगों को खोजने और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने की है।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

हादसे की खबर फैलते ही आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग नदी किनारे पहुंच गए। जिन परिवारों के सदस्य नाव पर सवार थे, उनकी चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

नदी किनारे मौजूद कई महिलाएं और बुजुर्ग अपने परिजनों के नाम पुकारते नजर आए। हर गुजरते मिनट के साथ लोगों की बेचैनी बढ़ती जा रही है। गांव में मातम जैसा माहौल है और हर कोई रेस्क्यू टीम से अच्छी खबर मिलने की उम्मीद लगाए बैठा है।

कोसी नदी में पहले भी हो चुके हैं हादसे

कोसी नदी को बिहार का “शोक” कहा जाता है। हर साल बाढ़ और तेज धाराओं के कारण इस नदी में कई दुर्घटनाएं होती हैं। नदी किनारे बसे गांवों के लोगों को आज भी सुरक्षित परिवहन की पर्याप्त सुविधा नहीं मिल पाई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई जगहों पर पुल और बेहतर यातायात व्यवस्था नहीं होने के कारण लोगों को नावों पर निर्भर रहना पड़ता है। बरसात के मौसम और तेज धाराओं के दौरान यह जोखिम और बढ़ जाता है।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस हादसे के बाद एक बार फिर नाव संचालन और सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नावों की नियमित जांच, क्षमता का पालन और सुरक्षा उपकरणों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तो ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नावों में लाइफ जैकेट, प्रशिक्षित चालक और निर्धारित क्षमता का पालन अनिवार्य होना चाहिए। साथ ही प्रशासन को नियमित निगरानी भी करनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की दुखद घटनाओं से बचा जा सके।

रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी सबकी नजर

फिलहाल प्रशासन, गोताखोर और राहत दल लगातार नदी में खोज अभियान चला रहे हैं। पूरे इलाके की नजर रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी हुई है। हर कोई यही उम्मीद कर रहा है कि लापता लोग सुरक्षित मिल जाएं और उनके परिवारों को राहत की खबर मिले।

कोसी नदी में हुआ यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि ग्रामीण इलाकों में सुरक्षित यातायात व्यवस्था और नाव संचालन के सख्त नियम कितने जरूरी हैं। फिलहाल सुपौल जिला प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है।

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