कोसी बैराज पर खतरे की स्थिति, 1.68 लाख क्यूसेक पानी का बहाव; 19 गेट खोले गए, जानें ताजा अपडेट

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सुपौल: बिहार की जीवनरेखा और साथ ही “बिहार का शोक” कहलाने वाली कोसी नदी एक बार फिर चर्चा में है। नेपाल से आने वाले लगातार पानी के कारण कोसी बैराज पर जलप्रवाह खतरे की श्रेणी में बना हुआ है। ताजा उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कोसी बैराज पर जलप्रवाह 1,68,770 क्यूसेक दर्ज किया गया है। हालांकि राहत की बात यह है कि पानी का रुझान घटने (Falling Trend) की ओर है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए बैराज के 19 गेट खोलकर अतिरिक्त पानी की निकासी की जा रही है।

जल संसाधन विभाग के अधिकारी लगातार बैराज की निगरानी कर रहे हैं। नदी के जलस्तर, बैराज के दबाव और डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों की स्थिति पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी संभावित आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।

खतरे की श्रेणी में क्यों है जलप्रवाह?

कोसी नदी का अधिकांश जलग्रहण क्षेत्र नेपाल के पहाड़ी इलाकों में स्थित है। मानसून के दौरान नेपाल में होने वाली भारी बारिश का सीधा असर बिहार में देखने को मिलता है। पहाड़ों से तेज गति से आने वाला पानी कुछ ही घंटों में कोसी बैराज तक पहुंच जाता है। यही कारण है कि मानसून के समय कोसी नदी का जलप्रवाह अचानक बढ़ जाता है।

वर्तमान में दर्ज 1,68,770 क्यूसेक जलप्रवाह को खतरे की श्रेणी में माना जा रहा है। हालांकि जलप्रवाह में गिरावट दर्ज की जा रही है, फिर भी प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।

19 गेट खोलकर की जा रही पानी की निकासी

Koshi Barrage Gate

कोसी बैराज पर जलप्रवाह को नियंत्रित रखने के लिए 19 गेट खोले गए हैं। इन गेटों के माध्यम से अतिरिक्त पानी को नियंत्रित तरीके से नीचे की ओर छोड़ा जा रहा है। बैराज के गेट खोलने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि पानी का दबाव बैराज पर अधिक न बढ़े और जल निकासी सुचारु रूप से होती रहे।

जल विशेषज्ञों का कहना है कि आवश्यकता के अनुसार गेटों की संख्या बढ़ाई या घटाई जा सकती है। यह पूरी तरह नदी के जलप्रवाह और मौसम की स्थिति पर निर्भर करता है।

जलप्रवाह घटने से मिली राहत

हालांकि कोसी बैराज की स्थिति अभी भी खतरे की श्रेणी में बनी हुई है, लेकिन पानी का रुझान घटने की ओर होना राहत की खबर है। यदि नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश नहीं होती है तो आने वाले समय में जलप्रवाह में और कमी आने की संभावना रहती है।

फिर भी मौसम में अचानक बदलाव होने पर स्थिति तेजी से बदल सकती है। इसलिए विभाग लगातार आंकड़ों का विश्लेषण कर रहा है।

प्रशासन की सतर्क निगरानी

कोसी नदी के बढ़ते जलप्रवाह को देखते हुए संबंधित विभाग और जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं। नदी किनारे के संवेदनशील इलाकों पर विशेष नजर रखी जा रही है। तटबंधों का निरीक्षण किया जा रहा है तथा किसी भी प्रकार के कटाव या रिसाव की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारी भी लगातार हालात की समीक्षा कर रहे हैं ताकि आवश्यकता पड़ने पर राहत एवं बचाव कार्य तुरंत शुरू किया जा सके।

नदी किनारे रहने वाले लोगों के लिए सलाह

प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से नदी के पास न जाएं। तेज बहाव वाले क्षेत्रों में स्नान, मछली पकड़ने या नाव से आवागमन करते समय विशेष सावधानी बरतें।

इसके अलावा स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की सलाह दी गई है। किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और आपात स्थिति में तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचना दें।

कोसी नदी का महत्व

कोसी नदी बिहार की प्रमुख नदियों में से एक है। यह नेपाल के हिमालयी क्षेत्र से निकलकर बिहार में प्रवेश करती है और लाखों लोगों की कृषि, पेयजल तथा आजीविका से जुड़ी हुई है। हालांकि मानसून के दौरान यही नदी कई बार बाढ़ और कटाव का कारण भी बनती है।

कोसी नदी का प्रवाह अत्यधिक तेज होने के कारण इसे नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण माना जाता है। इसी उद्देश्य से कोसी बैराज का निर्माण किया गया था ताकि जलप्रवाह को नियंत्रित किया जा सके और सिंचाई तथा बाढ़ प्रबंधन में सहायता मिल सके।

किसानों की नजर बारिश और जलप्रवाह पर

मानसून के दौरान किसान भी कोसी नदी की स्थिति पर लगातार नजर रखते हैं। सामान्य जलप्रवाह खेती के लिए लाभदायक होता है, लेकिन अत्यधिक पानी खेतों में जलभराव और फसल नुकसान का कारण बन सकता है। इसलिए नदी का जलस्तर और मौसम दोनों किसानों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।

मौसम की स्थिति पर निर्भर करेगी आगे की तस्वीर

Koshi Barrage Water Level

विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में नेपाल और उत्तर बिहार में होने वाली बारिश तय करेगी कि कोसी नदी का जलप्रवाह किस दिशा में जाएगा। यदि बारिश कम रहती है तो जलप्रवाह में और गिरावट दर्ज हो सकती है। वहीं लगातार भारी बारिश होने पर जलस्तर फिर बढ़ सकता है।

इसी कारण जल संसाधन विभाग, मौसम विभाग और जिला प्रशासन के बीच लगातार समन्वय बनाए रखा जा रहा है।

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